तन्हाई भरी शायरी – संग्रह

तन्हाई भरी शायरी पढ़ने का क्या आनन्द है, ये तो वो ही बता सकते हैं जो तन्हाई झेल चुके हैं। हो सकता है, अब आप कहेंगे कि तन्हाई क्या होती है। दरअसल ‘तन्हाई’ उर्दू भाषा का शब्द है जो ‘तन्हा’ से बना है। तन्हा का मतलब होता है अकेला और तन्हाई का मतलब होता है अकेलापन।

तन्हाई को स्पष्ट करने के लिए यह वाकया बहुत ही अहम है। किसी शख्स ने पूछा –

तन्हाई क्या होती है, मुझे बता सकता है कौन।
कितना है दर्द इसमें, ये समझा सकता है कौन।।

तो किसी शायर ने जवाब दिया –

जिसने रातें काटी हों तारे गिन-गिन कर।
इन्तजार किया हो लम्हे गिन – गिन कर।।
वो ही बता सकता है क्या होती है तन्हाई।
इसका तजुर्बा उसी से पूछना मेरे भाई।।

अतः जब कोई शख्स अकेलेपन में या तन्हाई में अपने दिल के जज्बातों को कहता है तो उसे तन्हाई शायरी कहते हैं। कुछ लोग इसे और भी कई नामों से जानते हैं, जैसे – तन्हाई भरी शायरी, तन्हाई की शायरी, अकेलापन शायरी आदि।

इस संग्रह में शामिल की गई प्रत्येक तन्हाई शायरी अपने आप में विशेष खास है। हो सकता है कि ये अकेलेपन की शायरियाँ आपकी जिंदगी और भावनाओं से भी मेल खाती हों। यदि इस तरह का संयोग बनता है तो ये आपके लिए विशेष उपयोगी साबित होंगी। आप अपने तन्हाई के दर्द को बयां करने के लिए यहाँ से किसी भी अकेलेपन की शायरी को अपने दोस्तों के साथ फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सएप्प आदि पर शेयर कर सकते हैं।

जब याद तुम्हारी आती है मैं ख्वाबों में खो जाता हूँ।
लेकर मन में नाम तुम्हारा मंत्रमुग्ध हो जाता हूँ।।
तेरा ख्वाब देखने को मैं दिन मैं भी सो जाता हूँ।
कभी होश में आता हूँ, बेहोश कभी हो जाता हूँ।।

किसी को दर्द ने मारा किसी को रूश्वाई ने मारा।
लेकिन मुझे मारा तो सिर्फ तेरी तन्हाई ने मारा।।

ऐ दिल तू धड़कना बंद कर दे।
तेरे धड़कने से उनकी याद आती है।।
वो तो मस्त है अपनी दुनिया में,
उनको याद करके पल-पल जान तो हमारी जाती है।।

बुरा न मान जाना तुम मेरे जज्बात का।
इरादा हो गया है फिर से मुलाकात का।

दर्द भरी शायरी

हर साँस में तुम्हारा नाम लेता हूँ।
नाम तुम्हारा गुनगुनाता रहता हूँ।।
तुम्हारी यादों के सहारे जी रहा हूँ,
इसीलिए कलेजा थाम लेता हूँ।।

तेरी यादों के चिराग उजाला करते हैं रात भर।
इसी उजाले के सहारे हम जागते हैं रात भर।।

न चाहते हुए भी आज मैं तुमसे दूर हूँ।
पर क्या करूँ, बहुत मजबूर हूँ।।
मैं सिर्फ तुम्हारा हूँ, तुम्हारा ही रहूँगा,
और तुम्हारे प्यार से ही मशहूर हूँ ।

आज फिर बैठा मैं तराना दिल का छेड़कर।
आजा सनम मेरे पास दिल की इस आवाज पर।।

जुदाई शायरी

उनके प्यार में दिल मेरा बेघर हो गया।
तन्हा दिल को जमाने से डर हो गया।।
अंधेरों की तो बात ही छोड़ दो,
अब तो हमें उजालों से भी डर हो गया।।

बरसों से इन्तजार था आँखें तरस रही थी।
बनके सीने में शोला यादें बरस रही थी।।

खूबसूरत शाम थी, हाथों में जाम था।
यादों में खो गए, न कोई काम था।।
न आए आप तो महफ़िल उजड़ गयी,
हसीन माहौल की रौनक बिगड़ गयी।।

कसमें तो वो कुछ इस तरह खाते हैं।
चाय, दूध पीते हैं या रोटी चबाते हैं।।
हम बुलाते हैं उन्हें यूँ रोज-रोज मगर,
हर रोज यही कहते हैं कि कल आते हैं।।

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