सोच में परिवर्तन 

जंगल में आज काफी चहल पहल थी। सभी जानवर व पक्षी गर्मी की छुट्टियां समाप्त होने पर अपने अपने घरों को लौट रहे थे। सोनू बंदर आज बहुत परेशान था। क्योंकि उसको यह चीज समझ में नहीं आ रही थी की ये स्कूल भला है क्या चीज हैं। इस चक्कर में वह कई  बार अपने पिता भोंदू से पिटाई भी खा चुका था और लगातार दो साल से दूसरी क्लास में फेल हो रहा था। जंगल के सभी बच्चे पढ़ने में होशियार थे।इस कारण सोनू की माँ मुनिया को हमेशा उसकी चिंता रहती थी।कोई भी उसके बेटे के बारे में तनिक भी कुछ बोले तो वह दुखी हो जाती। इसका एक कारण यह भी था की सोनू का मित्र मोनू पढ़ने में होशियार था व कक्षा में हमेशा प्रथम आता था। मोनू को सब पसंद करते सोनू को कोई नहीं। जंगल का मुखिया शेरु तो यहाँ तक कह चुका था की सोनू कभी पास हो ही नहीं सकता। सोनू अंदर से पूरा टूट चुका था ।

वह समझ नहीं पा रहा था कि क्या करुँ क्या न करुँ। दोपहर का दूसरा पहर बीत चुका था किन्तु सोनू अब भी गुमसुम बैठा था उसे लग रहा रहा था की वाकई उसकी वजह से माँ और पिता को बहुत कुछ सुनना पड़ता है। अत: वह आज ही इस जंगल को छोड़ देगा। किंतु धीरे धीरे साँझ होने को थी इसलिए उसने अगले दिन सवेरे जंगल को छोड़कर बहुत दूर चले जाने का निश्चय किया। न जाने आज सोनू को नींद क्यों नहीं आ रही थी वह विचार मंथन में डूबा हुआ था तभी उसको माँ बाऊजी की कुछ फुसफुसाहट सुनाई दी। माँ कह रही थी की हमारा सोनू भले ही पढ़ाई में कमजोर हो किंतु सभी का सम्मान करता हैं और हमारा भी कहना मानता हैं। जबकी जंगल के अन्य बच्चे ऐसा कतई भी नहीं करते .

पिता कहने लगे, हाँ मैं भी खामख्वाह उसे डांट देता हूँ। वाकई हमारा सोनू बहुत अच्छा हैं। ये सुनकर सोनू को खुदपर पछतावा हुआ और उसने अगली बार अच्छी पढ़ाई कर अच्छे अंक लाने की कसम खाई और जाकर के माँ बाप की बाँहों से लिपटकर रोने लगा और कहा मैं आप दोनों के बारे में कितना गलत सोचता था, मुझे माफ कर दो माँ पिताजी मैं आगे से ऐसा कोई काम नहीं करुँगा जिसकी वजह से आपको सुनना पडे़। माता पिता अपने बच्चे के इस चरित्र परिवर्तन से बहुत खुश थे। आज सोनू अपने माता पिता के साथ सोया और सुबह उठकर माता पिता के पैर छुये और हँसी खुशी स्कूल की ओर चल पड़ा और मन लगाकर पढ़ाई की ओर अपना होमवर्क भी समय पर पूरा करके  रोज अपने गुरुजी हाथी दादा को चेक करा देता। दिन गुजरते रहे समय निकलता रहा आखिर वो दिन आ ही गया जब सोनू का परिणाम आने वाला था। उसके माता पिता घबराये हुये थे और सोच रहे थे की अगर इस बार पास नहीं हो पाया तो वे क्या करेंगे और सोनू सोच रहा था गाँव के मुखिया की भविष्यवाणी एक बार फिर सच हो जायेगी।

इतने में उसे अपनी ओर कोई आता दिखाई दिया हाँ वह सोनू का मित्र मोनू था जो उसे अक्सर स्वयं के कक्षा में प्रथम आने की सूचना दिया करता था। सोनू की मुख पर तनाव बढ़ने लगा। वह  बड़ी खुशी के साथ मिठाई लेकर सोनू की ओर बढ़ रहा था एक बार तो सोनू को लगा शायद मोनू प्रथम आया इसलिए, पर यह क्या,उसने तो सोनू को गोद में उठा लिया और सोनू तुम पूरे जंगल में फर्स्ट आये हो तुम्हें बधाई हो।आज पूरा जंगल इस दृश्य को देख रहा था। गाँव का मुखिया शेरु अपने कहे हुये पर लज्जित था और उसे इस बात का पछतावा भी था, वह सब भूलकर  सोनू को पीठ पर बिठाकर नाच रहा था। सोनू के माता पिता की आँखों से खुशी के आँसू फूट रहे थे। वे गर्व से फूले नहीं समा रहे थे।

इतने में सोनू के गुरुजी हाथी दादा भी आ गये जिन्होंने सोनू को पढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी और आकर सोनू की पीठ थपथपाई और सदा जीवन में सफल होने का आशीर्वाद देकर वे लौट गये। समस्त जानवर व पशु पक्षी अपने अपने घरों को लौट गये। सोनू व उसका परिवार भी हँसी खुशी अपने घर को लौट गया। आज जंगल का हर बच्चा अच्छा पढ़ लिखकर  आने वाले भविष्य का सपना देख रहा था और यह सम्भव हो पाया था सोनू की वजह से जिसने कड़े परिश्रम से गांव में प्रथम आकर  दूर दूर तक अपना और अपने गाँव का नाम रोशन किया था।

शिक्षा – एक अच्छी सोच आपका जीवन बदल सकती हैं।

 

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