इश्क शायरी संग्रह

इश्क शायरी आशिकों के लिए बहुत ही खास होती है। क्योंकि कि इश्क शायरी के जरिए से आशिक अपने दिल के जज्बातों को बड़ी आसानी और सलीके से बयां को आम बोलचाल की भाषा मेंकर देते हैं। किसी बात  न कहकर शायरी के जरिए से कहते हैं तो इश्क में चार चाँद लग जाते हैं।

और हम अपने पाठकों को बताना चाहते हैं कि इश्क का मतलब कामवासना या sex नहीं होता। इश्क का सही मतलब होता है – बहुत ज्यादा मौहब्बत। अर्थात जब किसी से इतनी ज्यादा मौहब्बत या लगाव हो कि उसके बिना रहा न जाए, या उसकी जुदाई में रह पाना नामुमकिन हो तो उसे इश्क कहते हैं।

तो दोस्तो, गहरी मौहब्बत करने वालों को आशिक कहते हैं। और दिल की गहराइयों से होने वाली मौहब्बत को इश्क कहते हैं। जरूरी नहीं कि इश्क प्रेमी या प्रेमिका से ही हो। इश्क संगीत, किताब, साहित्य आदि से भी हो सकता है।

अतः इश्क सही अर्थों में अश्लीलता, नग्नता या sex को दर्शाने वाला शब्द नहीं है। इसीलिए हम यहाँ इश्क शायरी का एक संग्रह पेश कर रहे हैं। इश्क का सम्बन्ध यदि अश्लीलता से होता, तो हम इश्क शायरी को निश्चित रूप से नजरअंदाज कर देते। क्योंकि हमारी नीतियाँ अश्लील सामग्री प्रकाशित करने की अनुमति नहीं देती। तो दोस्तो, पढ़िए आशिकों की शायरी या इश्क शायरी –

आशिकी में इश्क की बौछार होनी चाहिए।
दिल के दरिया में भी रफ़्तार होनी चाहिए।।
मल्लाह से कह दो कि किश्ती तेरे हवाले है,
हो किधर को भी मगर पार होनी चाहिए।।

जब इश्क ही किया है तो कुछ करके हटेंगे।
या तो इश्क ही हो जाएगा, या मरके हटेंगे।।

कहता है इश्क प्यार की जुबानी।
प्यार में होती है इश्क की कहानी।।
प्यार तो हो सकता है जिन्दगी भर,
पर होता इश्क जवानी की निशानी।।

इश्क के मोती हम जमीन पर बो चुके।
तुमसे बिना पूछे ही हम तुम्हारे हो चुके।।

होता है इश्क उन्हीं पर मेहरबां।
होते हैं जो किसी और के लिए जवां।।
करते हैं इश्क जो प्यार के लिए,
देते हैं साथ उनका जमीं – आसमां।।

प्यार मौहब्बत की शायरी

मुझे दे अनमोल दौलत जो पास है तेरे।
तेरे काम की नहीं काम आएगी मेरे।।

इश्क में ही दो दिलों का मेल है।
इश्क में ही जन्नत का महल है।।
इश्क ही आनंद की रेल है,
इश्क ही सबसे प्यारा खेल है।।

देखा तुझे तो दिल में शरारत जाग उठी।
जब नजरें मिली तो क़यामत नाच उठी।।

इश्क ही दुनिया की बेल है।
खुशियों से लबालब रेल है।।
इसमें कोई दोराय नहीं कि इश्क,
दुनिया का सबसे प्यारा खेल है।।

आशिक कहलाने वालो गम नहीं करना।
इश्क में जान भी जाए पर आह नहीं भरना।।

इश्क शायरी पढ़ने के शौकीन इस पूरे संग्रह को पढ़ें। हमें विश्वास है कि इश्क शायरी का यह आपको अच्छा लगेगा।

आशिकों के घर बसते तो नहीं देखे।
सदियों तक आशिक हँसते तो नहीं देखे।।
लेकिन सब कुछ छोड़ दिया जिन्होंने मौहब्बत में,
वो ज़माने के बीच में फंसते भी नहीं देखे।।

और भी कलियाँ थी बाग में पर भौंरे तुम पर मरते थे।
न जाने क्या जादू था तुझमें सब तेरे पास से गुजरते थे।।

आशिकों के लिए इश्क तो सिर्फ बहाना है।
और यह बहाना ही उनका आशियाना है।।
इबादत और इज्जत करते हैं मौहब्बत की,
क्योंकि मौहब्बत इश्क का आइना है।।

आया हूँ तेरे मयखाने पर तू इतनी तो पिला दे।
या तो बेहोश ही कर दे या मुझे होश में ला दे।।

दोस्ती की शायरी

असल है कि इश्क आलस भागता है।
सोते हुए आशिक को को जगाता है।।
लेकिन यदि इश्क खुद ही सो जाए,
तो आशिक की नींद ले जाता है।।

ये कुदरत का लिखा है, भँवरे फूलों पर मँडराएँगे।
होगी जिस गली में हसीना वहीं आशिक चक्कर लगाएँगे।।

इश्क की तड़फन इतनी बुरी है।
कि गर्दन पर भी लगती कोमल छुरी है।।
दिल की कितनी गहराई से होता है यह,
तभी तो यह ज़माने की धुरी है।।

रोज रोज पिलाने से इक बार पिला साकी।
ले ले रोकड़ा अपना जो हिसाब हो बाकी।।

कभी इश्क फंदा बन जाता है।
फँसा-फँसा कर रुलाता है।।
तो कभी खुशियों का सौदा बनकर,
मुफ्त में ही गुल खिलाता है।।

ऐ आशिक, तेरी उम्र बहुत बड़ी है।
प्रेमिका को याद किया और वो तैयार खड़ी है।

इश्क शायरी का यह संग्रह आपको कैसा लग रहा है? अपनी प्रतिक्रिया देना न भूलें।

इश्क जितना हो उतना ही कम है।
प्यार से हो तो स्वर्ग सम है।।
यदि हो जाए इश्क प्यार के बिना,
तो समझ जो जिंदगी में फिर गम ही गम है।।

ज़माने की यह बदलती हुई रीति है।
पहले दोस्ती फिर प्यार प्रीति है।।
गर एक लड़का और लड़की हो तो,
उनकी दुनिया ही इश्क का संगीत है।।

हास्य शायरी

गर कोई आदी इश्क का तो बीमारी है।
इश्क हो प्यार के लिए तो आनंद की फुलवारी है।।
शौक के लिए हो इश्क तो बर्बाद जिंदगी,
जवानी की शरारत हो इश्क तो बहुत बड़ी बीमारी है।।

इश्क ईमान हरा देता है।
इश्क जान ले लेता है।।
इश्क सिर्फ आनंद के बदले में,
कई बार तो इंसान को हैवान बना देता है।।

उन्हीं की जवानी जवान है उनसे।
इश्क पर काबू पाया न जाता जिनसे।।
करते हैं मौहब्बत जो सिर्फ इश्क के लिए,
इश्क भी करने लगता है बैर उनसे।।

आशा है कि ये इश्क शायरी आपको खूब पसन्द आ रही होंगी। यदि आपके पास कोई सुझाव है तो हमें जरूर बताएँ।

लाइलाज बीमारी है इश्क।
पल भर की तफरी है इश्क।।
ठग और बैरी है इश्क।
रुसवाई की गठरी है इश्क।।

कहते हैं जो इश्क में दिल लगाना।
परखा नहीं अभी तक उन्होंने जमाना।।
इश्क के खिलाड़ी होते हैं शर्मिंदा,
जब खेल-खेल में उजड़ जाता है आशियाना।।

दर्द भरी शायरी

आशिकों के भी कई प्रकार होते हैं।
कुछ बुझदिल तो कुछ दिलदार होते हैं।।
कुछ आशिक होते हैं उमंग से भरे,
तो कुछ पहले से ही हिम्मत हर होते हैं।।

जीने में क्या रखा है।
मरने में क्या रखा है।।
सबसे अच्छा स्वाद तो,
आशिक ने चख रखा है।।

प्रीति की प्रेरणाएँ प्रबल हो गयी।
कामनाएँ दबी सब व्याकुल हो गयी।।
अपबीती कहेंगे भला किस तरह,
जब मिलन में ही आँखें सजल हो गयी।।

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