रचनाकारों के लिए

हम सभी हिन्दी रचनाकारों का भाषा विस्तार के लिए आह्वान करते हैं। कोई भी रचनाकार, संकलक या प्रेषक हिन्दी में किसी भी विषय से सम्बन्धित लेख प्रकाशित करवाने के लिए निवेदन कर सकता है। इसके लिए रचना प्रविष्ट करें पेज पर जाएँ और यथाविधि अपनी रचना प्रविष्ट करें। रचना की श्रेणी, उत्कृष्टता, सार्थकता आदि को ध्यान में रखते हुए हम रचना को प्रकाशित करते हैं। यहाँ पर किसी भी उत्कृष्ट लेख का श्रेय रचनाकार, संकलक या प्रेषक को जाता है।

यह वेबसाइट प्रकाशित करने का एक माध्यम मात्र है। विवादास्पद, अश्लील, राष्ट्रद्रोही, अशान्तिजनक आदि प्रकार की रचनाएँ स्वीकार्य नहीं हैं। यदि भूलवश हमसे विवादास्पद, अश्लील, राष्ट्रद्रोही, अशान्तिजनक आदि प्रकार की कोई रचना प्रकाशित हो जाये तो हम उसके लिए क्षमा चाहते हैं। कोई भी व्यक्ति हमें उसके लिए सूचित कर सकता है। हम उस रचना या लेख को वेबसाइट से अतिशीघ्र हटाने का प्रयास करेंगे। उस विवादित रचना के प्रचार – प्रसार से हुई सामाजिक, राष्ट्रीय या किसी अन्य प्रकार की हानि के लिए रचनाकार, संकलक या प्रेषक स्वयं जिम्मेदार व जवाबदेय होगा।

किसी भी रचना को प्रकाशित करने से पहले हम इंटरनेट के नियमों का विशेष ध्यान रखते हैं। जिससे हम सभी रचनाकारों को अवगत कराना चाहते हैं। पहले ये बता दें कि यह हमारा निजी नियम नहीं है। इंटरनेट की दुनिया में किसी वेबसाइट को सफल बनाने के लिए और उसका अच्छे स्तर पर प्रचार करने के लिए यह नियम सभी सर्च इंजनों द्वारा लागू किया गया है।

नियम यह है कि हम किसी भी ऐसे लेख को प्रकाशित नहीं कर पाएंगे, जो पहले से ही इंटरनेट पर किसी भी वेबसाइट के माध्यम से मौजूद हो। वह वेबसाइट कोई ब्लॉग हो, ई-पत्रिका हो, सोशल मीडिया हो या किसी अन्य प्रकार की साइट। इस नियम को इस उदाहरण द्वारा स्पष्ट करना चाहता हूँ।

माना कि आपका कोई लेख सोशल मीडिया या किसी अन्य प्रकार की साइट पर प्रकाशित है तो सर्च इंजन (जैसे-गूगल) उसे कुछ ही समय में पढ़ लेते हैं और अपने रिकॉर्ड में उसे शामिल कर लेते हैं कि अमुक लेख, अमुक वेबसाइट पर, अमुक समय पर मिला। अब यदि उसी लेख को हम अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित करते हैं तो सर्च इंजन की दृष्टि में वह लेख किसी दूसरी वेबसाइट से कॉपी किया हुआ है। उन्हें नहीं पता कि इस लेख को प्रकाशित करने के लिए HforHINDI.com और रचनाकार के बीच आपसी सहमति है। उसका मानना है कि HforHINDI.com के पास अपनी रचना नहीं है। इस वेबसाइट पर लेख किसी दूसरी वेबसाइट से कॉपी करके या चुराकर प्रकाशित किये जाते हैं। अतः उनकी दृष्टि में हम चोर सिद्ध हुए। और वे इस वेबसाइट को नकारात्मक दृष्टि से देखते हैं तथा इस वेबसाइट की रैंकिंग में बड़ी भारी गिरावट आती है। और प्रचार-प्रसार कार्य पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो जाता है।
इस विडम्बना से बचने के लिए ही हम इस नियम का विशेष ध्यान रखते हैं। इंटरनेट पर प्रचार-प्रसार के लिए और भी बहुत सारे नियम होते हैं, लेकिन यही नियम रचनाकारों के लिए उपयोगी और अनिवार्य है। इसलिए हमने इस नियम की उदाहरण सहित व्यख्या की है। और यह भी ध्यान देने योग्य है कि कोई लेख प्रिंट मीडिया में कितनी बार भी प्रकाशित हो चुका हो हमें उससे कोई एतराज नहीं है, हम उसे सहर्ष प्रकाशित करेंगे। क्योंकि गूगल प्रिंट मीडिया को नहीं पढ़ता, सिर्फ इंटरनेट पर मौजूद लेखों को पढ़ता है। अर्थात प्रिंट मीडिया में प्रकाशित लेख को रचनाकार प्रकाशन के लिए भेज सकते हैं।

वैसे हम साहित्य की भावनाओं का विशेष सम्मान करते हैं और समझते हैं कि साहित्य कितनी बार भी लिखा जाए, पढ़ा जाए या प्रकाशित किया जाए, कभी पुराना नहीं होता। लेकिन हम तकनीकी नियमों में बँधे हुए हैं, इसलिए इस नियम को निभाना हमारा अनिवार्य दायित्व है।

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