रचनाकारों के लिए

हम सभी हिन्दी रचनाकारों का भाषा विस्तार के लिए आह्वान करते हैं। कोई भी रचनाकार, संकलक या प्रेषक हिन्दी में किसी भी विषय से सम्बन्धित लेख प्रकाशित करवाने के लिए आवेदन कर सकता है। इसके लिए हमें hforhindi.com@gmail.com रचनाएँ भेजें। रचना की श्रेणी, उत्कृष्टता, सार्थकता आदि को ध्यान में रखते हुए हम रचना को सम्पादित व प्रकाशित करते हैं। यहाँ पर किसी भी उत्कृष्ट लेख का श्रेय रचनाकार, संकलक या प्रेषक को जाता है।

यह वेबसाइट प्रकाशित करने का एक माध्यम मात्र है। विवादास्पद, अश्लील, राष्ट्रद्रोही, अशान्तिजनक आदि प्रकार की रचनाएँ स्वीकार्य नहीं हैं। यदि भूलवश हमसे विवादास्पद, अश्लील, राष्ट्रद्रोही, अशान्तिजनक आदि प्रकार की कोई रचना प्रकाशित हो जाये तो हम उसके लिए क्षमा चाहते हैं। उसके लिए हमें कोई भी व्यक्ति ईमेल या मोबाइल के माध्यम से सूचित कर सकता है। हम उस रचना या लेख को वेबसाइट से अतिशीघ्र हटाने का प्रयास करेंगे। उस विवादित रचना के प्रचार – प्रसार से हुई सामाजिक, राष्ट्रीय या किसी अन्य प्रकार की हानि के लिए रचनाकार, संकलक या प्रेषक स्वयं जिम्मेदार व जवाबदेय होगा।

किसी भी रचना को प्रकाशित करने से पहले हम इंटरनेट के नियमों का विशेष ध्यान रखते हैं। इसीलिए हम सभी रचनाकारों को इन नियमों से अवगत कराना चाहते हैं। पहले ये बता दें कि ये हमारे निजी नियम नहीं हैं। इंटरनेट की दुनिया में किसी वेबसाइट को सफल बनाने के लिए और उसका अच्छे स्तर पर प्रचार-प्रसार करने के लिए ये नियम सभी सर्च इंजनों द्वारा लागू किये गये हैं।

पहला नियम यह है कि हम किसी भी ऐसे लेख को प्रकाशित नहीं कर पाएंगे, जो पहले से ही इंटरनेट पर किसी भी वेबसाइट के माध्यम से मौजूद हो। वह वेबसाइट कोई ब्लॉग हो, ई-पत्रिका हो, सोशल मीडिया हो या किसी अन्य प्रकार की साइट। इस नियम को इस उदाहरण द्वारा स्पष्ट करना चाहता हूँ।

माना कि आपका कोई लेख सोशल मीडिया या किसी अन्य प्रकार की साइट पर प्रकाशित है तो सर्च इंजन (जैसे-गूगल) उसे कुछ ही समय में पढ़ लेते हैं और अपने रिकॉर्ड में उसे शामिल कर लेते हैं कि अमुक लेख, अमुक वेबसाइट पर, अमुक समय पर मिला। अब यदि उसी लेख को हम अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित करते हैं तो सर्च इंजन की दृष्टि में वह लेख किसी दूसरी वेबसाइट से कॉपी किया हुआ है। उन्हें नहीं पता कि इस लेख को प्रकाशित करने के लिए hforhindi.com और रचनाकार के बीच आपसी सहमति है। उसका मानना है कि hforhindi.com के पास अपनी रचना नहीं है। इस वेबसाइट पर लेख किसी दूसरी वेबसाइट से कॉपी करके या चुराकर प्रकाशित किये जाते हैं। अतः उनकी दृष्टि में हम चोर सिद्ध हुए। और वे इस वेबसाइट को नकारात्मक दृष्टि से देखते हैं तथा इस वेबसाइट के प्रचार में बड़ी भारी गिरावट आती है। और प्रचार-प्रसार कार्य पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो जाता है।

और यह भी ध्यान देने योग्य है कि कोई लेख प्रिंट मीडिया में कितनी बार भी प्रकाशित हो चुका हो हमें उससे कोई एतराज नहीं है, हम उसे सहर्ष प्रकाशित करेंगे। क्योंकि गूगल प्रिंट मीडिया को नहीं पढ़ता, सिर्फ इंटरनेट पर मौजूद लेखों को पढ़ता है। अर्थात प्रिंट मीडिया में प्रकाशित लेख को रचनाकार प्रकाशन के लिए भेज सकते हैं।

वैसे हम साहित्य की भावनाओं का विशेष सम्मान करते हैं और समझते हैं कि साहित्य कितनी बार भी लिखा जाए, पढ़ा जाए या प्रकाशित किया जाए, कभी पुराना नहीं होता। लेकिन हम तकनीकी नियमों में बँधे हुए हैं, इसलिए इस नियम को निभाना हमारा अनिवार्य दायित्व है।

दूसरा नियम यह है कि हम किसी भी ऐसे लेख को प्रकाशित नहीं कर पाएंगे, जिसमें 600 से कम शब्द हों। इस नियम को लागू करने के पीछे गूगल की क्या मजबूरी थी पहले मैं आपको यह संक्षेप में स्पष्ट करना चाहता हूँ।

जैसा कि आप जानते होंगे कि जब कोई भी व्यक्ति किसी प्रकार की जानकारी हासिल करने के लिए सर्च इंजन (जैसे – गूगल) पर सर्च करता है तो गूगल उसके लिए सम्बन्धित परिणाम उपलब्ध कराता है। इसमें ध्यान देने योग्य बात यह है कि गूगल ने जो भी परिणाम उपलब्ध कराए हैं वे सभी वेबसाइट अलग – अलग लोगों या कम्पनियों द्वारा बनायी गई हैं। जो भी जानकारी वहाँ दी गयी है, गूगल ने उसी को उपभोक्ता के समक्ष प्रस्तुत किया है। तो अब आप समझ गए होंगे कि गूगल विश्व भर की वेबसाइटों में एकत्रित जानकारी को ही हमें दर्शाता है।

इन्टरनेट के शुरुआती दौर में सभी वेबसाइट धारक अपने-अपने तरीके से लेख प्रकाशित करते थे। उनमें से अधिकतर लोग ऐसे थे जो अपनी वेबसाइट पर पेज संख्या बढ़ाने के लिए किसी भी विषय पर पूर्ण जानकारी देने की बजाय आधी – अधूरी जानकारी ही प्रकाशित करते थे। और छोटे-छोटे लेख या सिर्फ दो – चार पंक्तियाँ लिखकर ही अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित कर देते थे। इससे इण्टरनेट के उपयोगकर्ता परेशान होने लगे। क्योंकि जब भी उन्हें कुछ सर्च करना होता था तो सर्च इंजन द्वारा उपलब्ध कराए गए परिणाम अकसर उन्हें संतुष्ट नहीं कर पाते थे। इसका मुख्य कारण वेबसाइटों पर प्रकाशित आधी – अधूरी जानकारी वाले छोटे – छोटे लेख ही थे।

ऐसे में गूगल ने उपभोक्ताओं की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए एक नियम लागू किया कि हर वेबसाइट के प्रत्येक पेज पर कम से कम 600 शब्दों का लेख होना अनिवार्य है। यदि किसी वेबसाइट पर ऐसा नहीं पाया गया तो प्रचार – प्रसार के लिए उसे नकारात्मक दृष्टिकोण से देखा जायेगा। अतः इस नियम की पालना के लिए हम कम से कम 600 शब्दों के लेख को ही स्वीकार करते हैं।

वैसे हम साहित्य लेखन की सभी विधाओं और शैलियों का विशेष सम्मान करते हैं और समझते हैं कि बहुत सारी विधाओं (जैसे – छन्द, ग़ज़ल, मुक्तक, लघुकथा आदि) में 600 शब्द लिख पाना संभव या व्यवहारसंगत नहीं है। लेकिन हम तकनीकी नियमों में बँधे हुए हैं, इसलिए इस नियम को निभाना हमारा अनिवार्य दायित्व है।

छन्द, ग़ज़ल, मुक्तक, लघुकथा आदि लिखने वाले रचनाकारों से हमारा निवेदन है कि वे हमें इन विधाओं का संग्रह भेजें ताकि उन सभी रचनाओं की शब्द गणना मिलकर कम से कम 600 हो जाये। और कई रचनाओं को मिलाकर एक साथ प्रकाशित किया जा सके।

उपर्युक्त विडम्बनाओं से बचने के लिए ही हम इन नियमों का विशेष ध्यान रखते हैं। और आशा करते हैं कि रचनाकार हमें इन नियमों के अनुरूप ही रचनाएँ भेजेंगे। इंटरनेट पर प्रचार-प्रसार के लिए और भी बहुत सारे नियम होते हैं, लेकिन ये नियम ही रचनाकारों के लिए उपयोगी और अनिवार्य हैं। इसलिए हमने इन्हीं नियमों की व्यख्या की है।

विशेष: इस पहल के अंतर्गत रचनाकारों से सम्बंधित वर्तमान में या भविष्य के लिए कोई आर्थिक रणनीति नहीं है। न ही हम रचनाकारों या पाठकों से कोई शुल्क लेते हैं और न ही उन्हें कोई शुल्क या राशि देते हैं।

उपर्युक्त लेख H for Hindi द्वारा 9 अगस्त, 2018 को संशोधित।

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