दर्द भरी शायरी (संग्रह)

दर्द भरी शायरी भी मौहब्बत के सिलसिले में अपना विशेष स्थान रखती है। क्यों कि कहा भी गया है – मौहब्बत की है है तो तैयार रहो दर्द और तबाही के लिए। दर्द भरी शायरी को लोगों ने अपनी – अपनी परिस्थितियों और बोलचाल के अनुसार अलग – अलग नाम दिए हैं जैसे – टूटे दिल की शायरी, तन्हाई भरी शायरी, दर्दे दिल शायरी, गम भरी शायरी, दुःख भरी शायरी, उदासी शायरी, सैड (sad) शायरी आदि।

तो दोस्तो, इस संग्रह में हम ऐसी शायरी पेश कर रहे हैं जो आपके दिल के दर्द को बयां करने में सक्षम है। गम भरी शायरी से लोग अपने दिल के दुखों का, अधूरी मौहब्बत का, जुदाई का, उदासी का और बहुत सारी ग़मगीन भावनाओं का इजहार करते हैं। आपकी सेवा में पेश है दर्द भरी शायरी –

अगर उनकी चाहत पे इकरार न करते।
उनकी झूँठी कसमों का एतबार न करते।।
ये पता होता कि हम सिर्फ मजाक हैं उनके लिए,
कसम से जान दे देते, पर प्यार न करते।।

हाय! इस दुनिया से मेरा मुकद्दर कितना कमजोर निकला।
जो खुशियों का वक्त होता है, वो भी मुसीबत का दौर निकला।।

चाँद की कीमत सितारों से पूछो।
कोयल की कीमत बहारों से पूछो।।
हरदम साथ रहने वाले क्या जानें,
औरत की कीमत फौजी-हवलदारों सी पूछो।।

दिल की लगी को दिल ही जनता है।
किसी और से कहो तो मजाक जनता है।।

दिल दिया न किसी को दिल्लगी के लिए।
दिल दिया था किसी की दिल्लगी के लिए।।
गर होता पता हमें रुसवाई का,
तो रोते नहीं आज दिल लगी के लिए।।

प्यार मौहब्बत की शायरी

दिल की दुनिया ग़मों की बस्ती है।
सारी दुनिया उदास लगती है।।

तुम्हें देखे बिना रहा नहीं जाएगा।
ये दर्द गम का सहा नहीं जाएगा।।
गर तुम वापिस नहीं आओगे,
तो दर्द किसी से कहा भी नहीं जाएगा।।

मान लो कहना हसीनो दिल लगाना छोड़ दो।
आशिकों पर जुल्म करके मुस्कुराना छोड़ दो।।

इस संग्रह में शामिल हर एक दर्द भरी शायरी अपने आप में पूर्ण है।

मेरी नज़रों में समा गई हो तुम।
आँखों से आँसू ढलवा गई हो तुम।।
गिरते हैं तेरी याद में ये मोती,
शायद इनको अपने पास बुला गई हो तुम।।

दिल पर जो गुजरती है दिखा भी नहीं सकते।
गर चाहें सुनाना तो सुना भी नहीं सकते।।

दोस्ती की शायरी

कहीं ताकत के पंजों में कलाइयाँ गरीबों की।
कही दौलत की बाँहों में बहू-बेटियाँ गरीबों की।।
आँखों में हैं गम के आँसू, लेकिन बह नहीं सकते।
हम झुकते हैं तुम्हारे सामने, कुछ कह नहीं सकते।।

मैं दवाई मर्ज-ए-इश्क की, ऐ हसीना, बता कहाँ से लाऊँगा।
मर गया अगर तड़फकर तो गवाही खुदा से दिलवाऊँगा।।

दुनिया के चलन को क्या कहिए, जो चीज पुरानी होती है।
वर्षों जो हकीकत रहनी है, एक रोज कहानी होती है।।
एक ठेस लगी, काँटा-सा चुभा, कुछ दर्द हुआ, आँसू टपके,
बर्बाद मौहब्बत की अकसर ऐसे ही कहानी होती है।।

दर्द भरी शायरी का भरपूर आनन्द लेने के लिए इस संग्रह को पूरा पढ़ें।

खुदा आपको इश्क के फंदे में न डाले।
आराम कहाँ जो दिल पड़ा गैरों के हवाले।।

दिल में दिलों का लगता है मेला।
फिर भी दिल रहता है अकेला।।
संकट में साथी रहा न कोई दिल का,
हर कोई देता है हारे में धकेला।।

इश्क शायरी

मुहब्बत करने वालों को जो देखा तो बुरा देखा।
किसी की आँख में आँसू, किसी को गमजदां देखा।।

संग सजन के चली गयी क्यूँ मुझे अकेला छोड़ दिया।
नाजुक-सा था दिल मेरा क्यूँ जानबूझकर तोड़ दिया।।
जो मैंने प्रेम से सींचा तो वो सुथरा बाग उजाड़ दिया।
प्रेम के बदले दागा किया, मैंने क्या तेरा बिगड़ दिया।।

लगाती हो चश्मा नजर छुपाने के लिए।
दिखाती हो अदा हमें तरसाने के लिए।।

दर्द शायरी के इस संग्रह में हमने दोनों तरह (दो लाइन और चार लाइन) के शायरियाँ शामिल की हैं।

क्यूँ कहते हो बार – बार कि दिल टूट गया तेरा।
और तुम्हारे बिछुड़ने से मुकद्दर फूट गया तेरा।।
मैं तो शुक्रगुजार हूँ खुदा का इसलिए कि,
किसी तरह तुमसे पीछा छूट गया मेरा।।

तुम लगे गैरों से मिलने दिल हमारा फट गया।
जो कदम उल्फत का था वो भी पीछे हट गया।।

हास्य शायरी

बात जब बनके बिगड़ जाती है।
रूह इस तरह कसमसाती है।।
उस बदनसीब दुल्हन को खुशियाँ कहाँ,
जिसकी बारात वापिस लौट जाती है।।

ऐ खुदा, हुस्न तो दिया तुमने काली जुल्फों वाली को।
काश दिल भी दिया होता इश्क की प्याली को।।

एक ही नजारा बार – बार देखने को मन नहीं करता।
मछली का भी सिर्फ जल से जीवन नहीं संवारता।।
क्यूँ कहते हो बार – बार एक ही बात को,
हर बार “हाँ” कहने के लिए हमारा दिल नहीं करता।।

यदि आप दर्द भरी शायरी लिखते हैं तो हमें प्रकाशित करने के लिए भेज सकते हैं।

वीरान हो गयी जिंदगी दिल खंडहर बन गया।
हलचल मची थी ऐसी कि बवंडर बन गया।।

एक दोस्त ने मुझे दोस्ती की याद में रुला दिया।
एक बार साथ रहकर हमेशा के लिए भुला दिया।।
हम तो भीड़ में भी पहले से ही अकेले थे,
अच्छा हुआ उसने अहसास दिला दिया।।

रवैया (Attitude – एटीट्यूड) शायरी

कयामत है किसी को प्यार करना इस ज़माने में।
क़ज़ा का सामान रखा है तैयार खजाने में।।

तेरी यादों में हम अश्क बहाते रहेंगे।
खुशी-खुशी ग़मों को सीने से लगाते रहेंगे।।
लेकिन तुम्हें भी चैन नहीं मिलेगा मुझे ठुकराकर,
वादे प्यार के तुम्हें भी याद आते रहेंगे।।

चाँदनी के रथ पर रात की दुल्हन जब आएगी।
याद आपकी हमारे दिल को तड़फा जाएगी।।

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एक और जख्म खाकर देखेंगे।
उसको अपना दर्द सुनाकर देखेंगे।।
उसकी हसरत है अगर दिल तोड़ने की,
तो अपना दिल कांच बनाकर देखेंगे।।

सब कहते हैं कि अगर नसीब होगा मेरा तो हम उन्हें जरूर पाएँगे।
हम सोचते हैं कि अगर हम बदनसीब हुए तो उनके बिना कैसे जी पाएँगे।।

आज अपने दिल के दरवाजे खोल दो।
जो भी है दिल में वो सब बोल दो।।
अगर हमारे अल्फाज तुम्हें अच्छे नहीं लगे,
तुम्हें मेरी कसम है कि मेरे खाने में जहर घोल दो।।

आँसू तो मेरी किस्मत है, तुम आकर मुझे रुला जाना।
मैं ताउम्र तुम्हें याद रखूँगा पर तुम धीरे-धीरे मुझे भुला जाना।।

बेवफा नहीं हूँ तो कैसे दिल तोड़ जाऊँगा।
सूरज की किरण हूँ, चमक छोड़ जाऊँगा।।
वादा नहीं कर सकता क्योंकि जिंदगी कर्जदार है,
न जाने किस वक्त अपनी साँसें छोड़ जाऊँगा।।

दर्द भरी शायरी। आशिकों की डायरी।। – पढ़ते रहिए।

जब कहा मैंने कि ओ जानेमन कब हमारी हसरत सँभाली जाएगी।
मुस्कुरा कर कह गयी वो बेरहम, चुप रहो सब देखी भाली जाएगी।।

एक बात बता दो, एक तरीका बता दो।
वो रास्ता जरा मुझे भी दिखा दो।।
अपनी सारी यादों से छुटकारा दिला दो।
तुम भूले हो जैसे मुझे वो तरीका मुझे भी बता दो।।

मुझे छोड़कर तुमने, न जाने किस-किस को किस किया।
अफ़सोस है मुझे, मेरी मिस ने ही मुझे मिस किया।।

ऐ हुस्न की मालकिन मुझको न कोस।
नए खून में चढ़ा जवानी का जोश।
तुमसे प्यार ही तो किया, मेरा क्या दोष।
तुम नाराज क्यों, अफ़सोस है अफ़सोस।।

तुम चली जाओगी बेशक मेरी जिंदगी से, लेकिन मैं दिल से कभी नहीं भुला पाऊँगा।
माना कि मैं बना दूँगा, एक और ताजमहल लेकिन तेरे बिन मुमताज कहाँ से लाऊँगा।।

करीब होकर भी दोनों की हालत-सी बिगड़ गयी है।
प्रेम-बंधनों की दुनिया में होड़-सी छिड़ गयी है।।
शायद तुझे घूँघट करने की और मुझे,
तेरा दीदार करने की आदत सी पड़ गयी है।।

तुम आँखों की जुबानी समझती नहीं, होठों से हम कुछ कह नहीं सकते।
अपनी बेवशी हम किस तरह बताएँ कि तेरे बिना अब रह नहीं सकते।।

फिजाओं में गुलिस्ताँ का कोई हमदम नहीं होता।
हमसफ़र के साथ आशिक को कोई गम नहीं होता।।
काश ये सच्चाई हम पहले से ही जानते कि,
दिल के जख्म को भरने का कोई मरहम नहीं होता।।

शाम तन्हा अब गुजरती नहीं, तुम आ जाओ शाम मेरी गुजर जाएगी।
बेचैन रूह को भी करार मिल जाएगा, तेरी पनाह में शाम सुधर जाएगी।।

और होंगे जो बेवफाओं से किनारा कर लें।
हम तेरा हर एक जुल्म हँस – हँस के गँवारा कर लें।।
ऐ बगवां, इसमें भी तौहीन है तेरी,
वर्ना हम तो गुलशन से निकलना भी गँवारा कर लें।।

तुम चली जाओगी बेशक मेरी जिंदगी से, लेकिन मैं दिल से कभी नहीं भुला पाऊँगा।
माना कि मैं बना दूँगा, एक और ताजमहल लेकिन तेरे बिन मुमताज कहाँ से लाऊँगा।।

खुदा की दुनिया का अजब दरबार लगता है।
जैसा जिसकी किस्मत में है वैसा ही प्यार मिलता है।।
बड़ी हो चली है आजकल ज़माने की सोच,
क्योंकि आजकल तो प्यार भी बिकता है।।

जब हमें तुमसे मौहब्बत थी तो तुम्हें हम पर शक था।
जब तुम्हें हम से मौहब्बत हुई तो हम पर किसी और का हक़ था।।

यूँ पड़ रही है चाँदनी उनके शबाब पर।
जैसे शराब खुद ही फ़िदा हो शराब पर।।
उसके पन्ने-पन्ने को उड़ा ले गयी हवा,
मैंने तुम्हारा नाम लिखा था जिस किताब पर।।

अपनी हर खुशी में ऐ दोस्त, मेरे दिल में से दर्दीली आवाज आती है।
जब-जब उठाता हूँ कलम कुछ लिखने को, उनकी सूरत याद आती है।।

न जाने यह कैसा अफसाना था।
उसके लिए हमारा ही नाम बेगाना था।।
कितनी सिद्दत से चाहा था उन्हें।
इस बात का गवाह सारा जमाना था।।

हिम्मत तो नहीं थी मुझे कि तेरे बिन जी पाऊँगा।
पर मालूम नहीं था मुझे कि मर भी नहीं पाऊँगा।।

इश्क की तड़फन तड़फने भी नहीं देती।
सुख-चैन से जिंदगी जीने नहीं देती।।
यदि कोई माँगे दुआ मरने की,
तो बेरहम मरने भी नहीं देती।।

चले जाएँगे इस जहान को छोड़ के कहीं।
न रहेंगे निशान हमारे किसी मोड़ पे कहीं।।

हमारी मौहब्बत का मजाक मत बनाइए।
हमारी तमन्नओं की राख मत बनाइए।।
तुम्हारी तन्हाई में होने लगा हूँ दुबला,
यूँ हमारी सेहत को खुराक मत बनाइए।।

नजरों को मोड़कर दिल का आशियाना जला दिया।
जरा अपने दिल से पूछो ये बुरा किया या भला किया।।

मेरे आँसुओं में इतना गम भरा है।
कि समुद्र में भी पानी कम भरा है।।
रख लूँगा इन बूँदों को सँभालकर,
क्योंकि इनमें भी तुम्हारा प्यार भरा है।।

दुनिया में हर सितम को गले से लगा लिया।
हर एक अश्क दिल के दामन में छिपा लिया।।

किसको फुर्सत है जो पूछे दिल की हालत मेरी।
कोई क्या जाने क्या है हकीकत मेरी।।
जब भी मेहंदी लगाती है वो हाथ में,
गैर-सी होने लगती है हालत मेरी।।

मुँह मोड़कर जाते हो जरा देख तो इधर भी।
मरता है कोई आशिक-ए-दिलगीर इधर भी।।

आता नहीं कोई अब अपने गरीब खाने में।
कहते हैं जी घबराता है हमारा वीराने में।।
बेताब क्यूँ लग रही हैं निगाहें इंतजार की,
और भी तो मिसाल हैं दोस्तो इस ज़माने में।।

कहीं और जाकर ये घटिया सा इल्जाम लगाओ।
तुम प्यार के काबिल नहीं मेरे पास से चले जाओ।।

रोते रहे बिलखते रहे।
तेरी यादों में हम तड़फते रहे।।
सारी दुनिया जब सो गयी,
हम जाग के तारे गिनते रहे।।

आपकी यादों में मेरा दिल दिन – रात रोता है।
न जाने क्यों रात भर मेरा दिल नहीं सोता है।।

मौहब्बत की आग जलाकर।
चले गए दामन बचाकर।।
हम प्यास भी न बुझा सके,
आँखों से अपनी अश्क बहाकर।।

गर दिल में असर न तेरे गम का होता।
तो क्यों में तड़फन के सागर में होता।।
आराम से गुजर जाती जिन्दगी मेरी,
काश! मेरा दिल भी तेरे जैसा होता।।

तेरी तस्वीर समझकर लिपट बैठे पत्थर की बुत से।
खून ऐ जिगर बहने लगा जख्म तो पहले ही मिल चुके थे।।

दिल में कितना दर्द है तुम्हें बताएँ कैसे।
हँसी आती नहीं तो हम मुस्कुराएँ कैसे।।
रातें कट जाती हैं तुम्हारी याद में,
भुलाना चाहें तो कहो भुलाएँ कैसे।।

आधी जिन्दगी मैंने सोने में गुजार दी।
और बची हुई आधी रोने में गुजार दी।।

दुल्हन बन गयी हर कसम तोड़कर।
बेघर हुए हम तुमसे रिश्ता जोड़कर।।
कुछ तो रहम करती मेरी मौहब्बत पर,
हम आये थे तेरे लिए सब दुनिया छोड़कर।।

देखा न कभी आपको फिर भी दिल लगा बैठे।
अपना दिल तुम्हारे प्यार में हम गँवा बैठे।।
सोचा न हमने कभी इसका अंजाम क्या होगा,
प्यार का घर समुन्दर की लहरों पर बना बैठे।।

हर महफ़िल याद आती है महफ़िल जाने के बाद।
हर गुनाह याद आता है जवानी के बाद।।
हसीनों से दिल्लगी अच्छी नहीं दिल्लगी इस ज़माने में,
उन्हें तो मजा आता है दिल तोड़ने के बाद।।

तेरे दिल में क्या था समझ न पाए हम।
तेरी दीवानगी यूँ छायी, सँभल न पाए हम।।
परदे की आड़ से कत्ल करेगी किसी दिन,
तेरा ये इरादा समझ न पाए हम।।

एतबार करें भी तो किसका करें इस ज़माने में।
उलझते चले गए हम हसीनों के फ़साने में।।
अब तो मरने के बाद ही सुकून मिलेगा,
वर्ना तड़फते ही रह जाएँगे आशियाने में।।

क्या बात है जो मुस्कुराना छोड़ दिया।
इस तरह हमसे दिल लगाना छोड़ दिया।।
क्या खता हुई हमसे जो मुँह छिपाया आपने,
आया आपके दर पे तो झलक दिखाना छोड़ दिया।।

रोते रहे हम जिन्हें याद करके।
अब हँसते हैं वही हमें बर्बाद करके।।

दिल को ऐसा जख्म मिला कि वो कभी ठीक न हो पाएगा।
दिल बन गया ग़मों की दुनिया अब कोई न इसमें आएगा।।
जख्म मिट जाते हैं दुनिया में मरहम के सहारे से,
लेकिन ये जख्म ही ऐसा है कि इस पर मरहम कोई नहीं लगाएगा।।

चले थे मौहब्बत की राह पर आपके सहारे।
आप ही थे किश्ती और आप ही थे किनारे।।
कसूर क्या था मेरा जो छोड़ दिया दरिया में,
कभी सोचा न था वक्त पर टूटेंगे सितारे।।

कौन देखता है किसी की मजबूरी इस जमाने में।
ग़मों का तोहफा देते हैं लोग इस जमाने में।।
कोई न देखता हमारे दिल के दर्द को,
जख्म दे जाते हैं हमें हँसने – मुस्कुराने में।।

चला मैं दुनिया से तो वो खुशियाँ मनाने लगे।
मेरी मइयत देखकर गैरों से दिल लगाने लगे।।
इतने बेरहम थे कि वो आए न मेरी लाश पर,
जनाजा उठा मेरा तो वो छुपकर मुस्कुराने लगे।।

लगता है आज वो किसी और की होने वाली है।
उसी की याद में मेरी जान जाने वाली है।।
आएँगी न साँसे, धड़केगा न सीना, उसके बिना,
बड़ी बेरहमी से जो पराई होने वाली है।।

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