रचना सूची

हास्य कहानियाँ – लोटपोट कर देने वाली बकरूदीन की कथाएँ

जैसा कि आप जानते होंगे आजकल के तनावपूर्ण दौर में पाठक हास्य कहानियाँ या कॉमेडी बहुत पसंद करते हैं। उनकी इस माँग और रूचि को ध्यान में रखते हुए हमने यह हास्य कहानियों का संग्रह तैयार किया है। हास्य...

रवीन्द्रनाथ टैगोर की आत्मकथा – पिता जी के साथ प्रवास

मेरे सिर मुंडन के कारण, मौजी बंधन समारम्भ के बाद मुझे एक बड़ी चिंता उत्पन हुई। गाय के दूध से तैयार होने वाले सन्देश, रसगुल्ला आदि पदार्थों के सम्बन्ध में यूरेशियन लडकों का कितना ही अच्छा मत हुआ तो भी...

आत्मकथा क्या है? संक्षिप्त व पूर्ण जानकारी

आत्मकथा गद्य की एक नवीन विधा है। यह उपन्यास कहानी-जीवनी की भाँति लोकप्रिय है। इसमें लेखक अपनी अन्तरंग जीवन-झाँकी चित्रित करता है और व्यक्ति, समाज, समूह के विषय में निजी अनुभूतियों को शब्द चित्रों के...

सूचना प्रौद्योगिकी के युग में संयुक्त परिवार

परिवार समाज की सबसे महत्वपूर्ण इकाई है जहां से व्यक्ति संस्कारवान होकर मानव एवं संपूर्ण सृष्टि के बारे में ज्ञानार्जन करता है। भारत प्राचीन काल से ही संयुक्त परिवार की इस सभ्य परंपरा को सहेजता...

बाल कविताओं का संग्रह

इस संकलन में हमने बच्चों की रूचि और मनोविज्ञान को ध्यान में रखते हुए सरल, मनोरंजक, शिक्षाप्रद और रोचक बाल कविताएँ प्रस्तुत की हैं। इनमें अधिकतम लोकप्रिय कविताएँ हैं जो कि प्रसिद्ध कवियों द्वारा लिखी...

हमारी अंतरा

अंतरा के माता–पिता नहीं थे। वह अपने चाचा–चाची के साथ रहती थी। चाची में अंतरा अपनी माँ की छवी को ही देखती थी पर उसकी चाची उससे घर का सारा काम करवाती थी। साथ ही बोलती भी रहती, न जाने क्या...

काउण्टर साइन

बाबू रामलाल पिछले छः महीने से बीमार हैं। कमज़ोर तो पहले से ही थे मगर इस बीमारी ने रही-सही कसर भी पूरी कर दी है। बेचारे सूख कर काँटा हो गए हैं। मैं बाबू रामलाल को पिछले तीन साल से जानता हूँ। वे मेरे...

माँ की सौगंध

दोपहर का समय था। पूना में सेना के वित्त विभाग के कार्यालय में एक नौजवान कर्मचारी बार-बार गिड़गिड़ाकर दो दिन की छुट्टी माँग रहा था। मगर अंग्रेज़ अधिकारी ने उसकी छुट्टी की अर्ज़ी मंजूर करने से इंकार कर...

यह भी नशा, वह भी नशा

होली के दिन राय साहब पण्डित घसीटेलाल की बारहदरी में भंग छन रही थी कि सहसा मालूम हुआ, जिलाधीश मिस्टर बुल आ रहे हैं। बुल साहब बहुत ही मिलनसार आदमी थे और अभी हाल ही में विलायत से आये थे। भारतीय रीति...

इण्डिया के सितारे

वे वैज्ञानिक थे और उनकी पत्नी थीं कवयित्री। हालाँकि वे खाते-पीते खानदानी थे, लेकिन दुर्भाग्य से भारत में पैदा हुए थे, जबकि उनके चचेरे और ममेरे भाई-बहन वाशिंगटन या लन्दन में। परास्नातक की पढ़ाई वे जैसे...

बाबा सन्तासिंह

सतलज नदी धीमी चाल से बह रही थी। उसके दोनों किनारों पर दूर-दूर तक रेत फ़ैली हुई थी। वैसाख की तेज़ दोपहरी में रेत के कण चांदी के समान चमक रहे थे। चारों ओर तेज़ धूप फ़ैली हुई थी, इसलिए दूर-दूर तक कोई आदमी...

रानी सारन्धा

अँधेरी रात के सन्नाटे में धसान नदी चट्टानों से टकराती हुई ऐसी सुहावनी मालूम होती थी जैसे घुमुर – घुमुर करती हुई चक्कियाँ। नदी के दाहिने तट पर एक टीला है। उस पर एक पुराना दुर्ग बना हुआ है जिसको...

महात्मा गाँधी की आत्मकथा – साक्षरता और समाज सेवा

जैसे-जैसे मैं अनुभव प्राप्त करता गया, वैसे-वैसे मुझे लगा कि अगर चम्पारन में ठीक से काम करना हो, तो गाँवों में शिक्षा का प्रवेश होना चाहिए। लोगों का अज्ञान दयाजनक था। गाँव में बच्चे मारे-मारे फिरते थे...

बाल कहानी संग्रह

इस कहानी संग्रह में हमने ऐसी बाल कहानियों का चयन किया है जिनके माध्यम से बच्चों का मनोरंजन तो होगा ही, साथ में उन्हें अच्छी शिक्षा भी मिलेगी। बाल मनोविज्ञान को ध्यान में रखते हुए रोचक, सरल और स्पष्ट...

सोच में परिवर्तन 

जंगल में आज काफी चहल पहल थी। सभी जानवर व पक्षी गर्मी की छुट्टियां समाप्त होने पर अपने अपने घरों को लौट रहे थे। सोनू बंदर आज बहुत परेशान था। क्योंकि उसको यह चीज समझ में नहीं आ रही थी की ये स्कूल भला...

बड़े भाईसाहब

जेल के घड़ियाल ने एक-एक करके बारह घंटे बजाए हैं। रात आधी बीच चुकी है। बैरक के सारे कैदी सो चुके हैं मगर रामपाल की आँखों से नींद कोसों दूर है। भटकती हुई उनकी यादें काफी दूर पहुँच जाती हैं। उनकी आँखों...

वरदान

विन्घ्याचल पर्वत मध्यरात्रि के निविड़ अन्धकार में काल देव की भांति खड़ा था। उस पर उगे हुए छोटे-छोटे वृक्ष इस प्रकार दष्टिगोचर होते थे, मानो ये उसकी जटाएं है और अष्टभुजा देवी का मन्दिर जिसके कलश पर ...

बस्ता खुश हो गया

देवांश की तबीयत ठीक नहीं थी। वह टेबल पर सिर रख कर सो गया। तभी उसे किसी के फुसफुसाने की आवाज आई। उस ने ध्यान से इधर-उधर देखा। आवाज किधर से आ रही है। तभी उस का ध्यान बस्ते की ओर गया। टेबल पर रखा उसका...

बड़े भाई साहब

मेरे भाई साहब मुझसे पाँच साल बड़े थे, लेकिन केवल तीन दरजे आगे। उन्होंने भी उसी उम्र में पढ़ना शुरू किया था जब मैने शुरू किया था, लेकिन तालीम जैसे महत्व के मामले में वह जल्दबाजी से काम लेना पसंद न...

अंधा कौन

आज रेयांश देश का सबसे प्रसिद्ध पेंटर है। वह देश व विदेश में अपनी पेंटिंग की प्रदर्शनियाँ लगाता है। उसकी एक-एक पेंटिंग एक-एक लाख रुपए की  बिक जाती है। वह अपना एक स्कूल भी चलाता है, जहाँ वह गरीब बच्चों...

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